यूपी में NEET री-एग्जाम: 3.5 लाख छात्रों की कड़ी सुरक्षा में परीक्षा, कहीं जूड़े खुले तो कहीं कलावा उतरा, बरेली में छात्रा बेहोश
इस वक्त उत्तर प्रदेश के शिक्षा जगत और प्रशासनिक अमले के मैदान से देश की सबसे बड़ी और संवेदनशील परीक्षा को लेकर एक बेहद सनसनीखेज, बड़ी और हर घर से जुड़ी हुई महा-ब्रेकिंग न्यूज़ सामने आ रही है। उत्तर प्रदेश में आज यानी रविवार को नेशनल एलिजिबिलिटी कम एंट्रेंस टेस्ट यानी NEET-UG 2026 की री-परीक्षा (दोबारा परीक्षा) का महा-आयोजन किया जा रहा है। पूरे प्रदेश के 59 जिलों में करीब 3.5 लाख अभ्यर्थी अपने डॉक्टर बनने के सपनों को अपनी आंखों में संजोकर परीक्षा केंद्रों पर पहुंचे हैं। आपको याद होगा कि इससे पहले बीते 3 मई को नीट की परीक्षा देश भर में आयोजित हुई थी, लेकिन उत्तर प्रदेश समेत कई जगहों पर पेपर लीक के खौफनाक जिन्न के बाहर आने के बाद, 12 मई को इस परीक्षा को पूरी तरह से रद्द कर दिया गया था। पेपर लीक का दंश झेलने के बाद नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) और उत्तर प्रदेश सरकार इस बार साख बचाने की अग्निपरीक्षा से गुजर रही है।
यही वजह है कि इस बार एग्जाम सेंटर्स पर सुरक्षा और चेकिंग के ऐसे कड़े और अभूतपूर्व इंतजाम किए गए हैं, जो इससे पहले कभी देखने को नहीं मिले। सुबह 11 बजे से लेकर दोपहर के डेढ़ बजे तक परीक्षा केंद्रों के मुख्य द्वारों पर अभ्यर्थियों को कड़ी मशक्कत के बाद ही एंट्री दी गई। एडमिट कार्ड, वैलिड फोटो पहचान-पत्र, फोटो और सिग्नेचर के गहन मिलान के साथ-साथ हर एक छात्र का थ्री-लेयर बॉयोमेट्रिक वेरिफिकेशन किया गया। चेकिंग की कड़ाई इस कदर थी कि कई जिलों से हैरान कर देने वाली तस्वीरें सामने आईं, जहां सुरक्षाकर्मियों ने छात्रों के जूते-मोजे तक उतरवा दिए। इस महा-परीक्षा की टाइमिंग दोपहर 2 बजे से लेकर शाम सवा 5 बजे तक मुकर्रर की गई है, और छात्रों की सहूलियत के लिए इस बार 15 मिनट का अतिरिक्त समय भी दिया गया है।
🚨 यूपी के अलग-अलग जिलों से चेकिंग और हादसों का ‘लाइव ग्राउंड रिपोर्ट कार्ड’
उत्तर प्रदेश के चप्पे-चप्पे से हमारे संवाददाताओं ने जो तस्वीरें भेजी हैं, वो यह साफ बयां करती हैं कि प्रशासन इस बार पेपर लीक को रोकने के लिए किस कदर सख्त और मुस्तैद नजर आ रहा है। आइए आपको सीधे लिए चलते हैं यूपी के उन मुख्य जिलों में जहां चेकिंग के दौरान हड़कंप जैसी स्थिति देखने को मिली:
- गोरखपुर (जूड़े खुलवाकर चेकिंग): गोरखपुर के परीक्षा केंद्रों पर महिला सुरक्षाकर्मियों ने चेकिंग के नाम पर कड़ाई की सारी सीमाएं पार कर दीं। परीक्षा देने पहुंचीं छात्राओं के सिर के बालों के जूड़े तक खुलवाकर गहनता से जांच की गई, ताकि कोई माइक्रो-चिप या ब्लूटूथ डिवाइस अंदर न जा सके।
- आजमगढ़ (जूते-मोजे और बालों का एक्स-रे): आजमगढ़ में अभ्यर्थियों को नंगे पैर परीक्षा केंद्रों के अंदर जाना पड़ा। वहां मुख्य द्वार पर ही छात्रों के जूते और मोजे उतरवा लिए गए और उनके बालों की उंगलियों से टटोलकर चेकिंग की गई।
- नोएडा (कलावा और ज्वैलरी पर पाबंदी): दिल्ली से सटे नोएडा के सेंटर्स पर धार्मिक और पारंपरिक आस्था से जुड़े धागे यानी ‘कलावा’ को भी कटर से काट दिया गया। लड़कियों के गले की चेन, अंगूठी और कान की ज्वैलरी को गेट के बाहर ही उतरवाकर परिजनों को सौंपने की हिदायत दी गई।
- झांसी (ईयररिंग पहनने पर रोका): झांसी में एक बेहद अजीबोगरीब वाकया सामने आया, जहां कान में ईयररिंग (बाली) पहनकर पहुंचे एक युवक को महिला और पुरुष सुरक्षाकर्मियों ने मुख्य द्वार पर ही रोक दिया। काफी बहस और ईयररिंग हटाने के बाद ही उसे अंदर जाने की इजाजत मिल सकी।
- बरेली (परीक्षा कक्ष में छात्रा बेहोश): बरेली के एक परीक्षा केंद्र से बेहद दुखद खबर सामने आई। परीक्षा के दौरान मुंशीनगर (थाना इज्जतनगर) की रहने वाली छात्रा तन्वी की अचानक तबीयत बिगड़ गई और वह पेपर लिखते-लिखते अचानक बेहोश होकर जमीन पर गिर पड़ी, जिससे पूरे सेंटर पर हड़कंप मच गया। केंद्र प्रशासन ने तुरंत उसे प्राथमिक उपचार दिया और एंबुलेंस बुलाकर पास के एक अस्पताल में भर्ती कराया है, जहां उसकी स्थिति पर डॉक्टरों की टीम लगातार नजर बनाए हुए है। पुलिस ने उसके परिजनों को भी सूचित कर दिया है।
🚓 लखनऊ पुलिस का ‘देवदूत’ अवतार; जीपीएस और सीसीटीवी की महा-निगरानी
जहां एक तरफ चेकिंग की कड़ाई से छात्र परेशान थे, वहीं उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से यूपी पुलिस का एक ऐसा मानवीय और दिल जीत लेने वाला चेहरा सामने आया है, जिसकी सोशल मीडिया पर जमकर तारीफ हो रही है। लखनऊ में एक छात्रा हड़बड़ाहट और हड़बड़ी के कारण गलती से किसी दूसरे परीक्षा केंद्र पर पहुंच गई थी। जब उसे अपनी गलती का अहसास हुआ, तो उसके पास सही सेंटर पर पहुंचने के लिए महज कुछ ही मिनट बचे थे और वह फूट-फूट कर रोने लगी। ऐन वक्त पर वहां तैनात लखनऊ पुलिस के जवानों ने देवदूत बनकर मोर्चा संभाला। पुलिसकर्मियों ने बिना वक्त गंवाए रोती हुई छात्रा को अपनी सरकारी पुलिस कार में बिठाया, हूटर बजाया और ट्रैफिक को क्लीयर कराते हुए समय रहते उसे सही परीक्षा केंद्र पर पहुंचा दिया, जिससे उस बेटी का पूरा साल बर्बाद होने से बच गया।
सुरक्षा और गोपनीयता का ‘हाई-टेक’ इंतजाम: प्रशासन ने इस बार लीक प्रूफ परीक्षा कराने के लिए पूरी ताकत झोंक दी थी। परीक्षा केंद्रों तक जो प्रश्न पत्र और ओएमआर (OMR) सीटें भेजी गईं, वो आम गाड़ियों से नहीं बल्कि जीपीएस (GPS) और डिजिटल लॉक से लैस विशेष सुरक्षा वाहनों के जरिए पहुंचाई गईं, जिनकी पल-पल की लोकेशन लखनऊ के मुख्य कंट्रोल रूम से ट्रैक की जा रही थी। इसके अलावा, प्रदेश के सभी परीक्षा केंद्रों के हर एक क्लास रूम की लाइव मॉनिटरिंग सीसीटीवी (CCTV) कैमरों के जरिए की जा रही थी, ताकि नकल माफियाओं के मंसूबों को पूरी तरह ध्वस्त किया जा सके।
💬 “जब पेपर लीक हुआ, तो मैं रोने लगी थी”—बेबस अभ्यर्थियों का छलका दर्द
इस री-एग्जाम के बीच सबसे बड़ा दर्द उन मध्यमवर्गीय और गरीब परिवारों के होनहार छात्रों का है, जिन्होंने दिन-रात एक करके मई की परीक्षा की तैयारी की थी, लेकिन सिस्टम के भ्रष्टाचार ने उनकी मेहनत पर पानी फेर दिया। सहारनपुर के एक परीक्षा केंद्र के बाहर हमारे रिपोर्टर से बात करते हुए अभ्यर्थी विदुषी चौधरी का दर्द साफ छलक उठा। विदुषी ने रुआंसे गले से कहा:
“जब 3 मई को पेपर देने के बाद हमें पता चला कि पेपर लीक हो गया है और 12 मई को परीक्षा रद्द कर दी गई, तो मैं फूट-फूट कर रोने लगी थी। ऐसा लगा जैसे हमारे सारे सपने एक झटके में टूट गए। हमें दोबारा से वही सब कुछ पढ़ना पड़ा, मानसिक तनाव झेलना पड़ा। सरकार और एनटीए को हमारे दर्द का अहसास नहीं है।”
वहीं दूसरी तरफ, सहारनपुर की ही एक और छात्रा प्रेरणा ने सिस्टम और नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) पर तीखा हमला बोलते हुए कहा:
“पेपर लीक जैसी घटनाओं पर एनटीए को इतनी सख्त और ऐतिहासिक कार्रवाई करनी चाहिए, ताकि भविष्य में कोई भी अपराधी ऐसा दुस्साहस करने की सोच भी न सके। बार-बार पेपर कैंसिल होने से हम बच्चों की सालों की कड़ी मेहनत, माता-पिता का पैसा और मनोबल सब कुछ पूरी तरह बेकार हो जाता है।”
🚌 योगी सरकार की बड़ी राहत: रोडवेज बसों के किराए में 50% की महा-छूट
अभ्यर्थियों की इस भारी परेशानी और आर्थिक बोझ को कम करने के लिए उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने इस बार एक बड़ा और संवेदनशील फैसला लिया था। परीक्षा देने जा रहे सभी 3.5 लाख छात्र-छात्राओं को यूपी रोडवेज (UPSRTC) की बसों के किराए में 50% की भारी छूट दी गई। छात्रों को बस कंडक्टर को सिर्फ अपना नीट एडमिट कार्ड दिखाना था और उनका आधा किराया माफ कर दिया गया, जिससे दूर-दराज के गांवों से आने वाले गरीब छात्रों को यात्रा करने में एक बहुत बड़ी आर्थिक राहत हासिल हुई।
📊 नीट-यूजी 2026 री-एग्जाम: पूरा तुलनात्मक और रणनीतिक सफरनामा
आइए इस टेबल के जरिए समझते हैं कि 3 मई से लेकर आज 21 जून तक नीट परीक्षा के इस सफर में क्या-क्या बड़े बदलाव और प्रशासनिक कदम उठाए गए हैं:
| मुख्य मानक और बिंदु | 3 मई 2026 की पहली परीक्षा | आज 21 जून 2026 का री-एग्जाम (ताजा स्थिति) |
|---|---|---|
| प्रशासनिक सतर्कता | सामान्य सुरक्षा इंतजाम थे, जिसका फायदा उठाकर नकल माफियाओं ने सेंधमारी की। | हाई-टेक जीपीएस निगरानी: पेपर ले जाने वाली गाड़ियों में जीपीएस और हर रूम में सीसीटीवी लाइव ट्रैकिंग। |
| कैंडिडेट्स की एंट्री गाइडलाइन | एडमिट कार्ड और पहचान पत्र की सामान्य जांच के बाद प्रवेश दिया गया था। | थ्री-लेयर बॉयोमेट्रिक: जूड़े खुलवाए गए, कलावा-ज्वैलरी उतरवाई गई और जूते-मोजे की भी सख्त चेकिंग हुई। |
| परीक्षा का कुल समय | निर्धारित 3 घंटे 20 मिनट का समय दिया गया था। | 15 मिनट अतिरिक्त: छात्रों के मानसिक तनाव को देखते हुए इस बार 15 मिनट का एक्स्ट्रा टाइम मिला। |
| परिवहन और आर्थिक सहायता | छात्रों को अपने निजी खर्च और पूरे किराए पर सेंटर्स तक पहुंचना पड़ा था। | 50% रोडवेज छूट: यूपी सरकार की तरफ से एडमिट कार्ड दिखाने पर आधा बस किराया पूरी तरह माफ किया गया। |
उत्तर प्रदेश में आज आयोजित हो रही इस नीट-यूजी 2026 की री-परीक्षा, प्रशासन द्वारा की गई इस बेहद सख्त और सिर के जूड़े खुलवाने वाली चेकिंग, और पेपर लीक के जिम्मेदार दोषियों के खिलाफ की जाने वाली सख्त कानूनी कार्रवाई को लेकर आपकी अपनी क्या राय है? क्या आपको लगता है कि ऐसे सख्त इंतजामों से अब यूपी में पेपर लीक का कलंक हमेशा के लिए मिट जाएगा? हमें नीचे दिए गए कमेंट बॉक्स में अपनी महत्वपूर्ण और बेबाक राय कमेंट करके जरूर साझा करें।